बेचारा पति क्या करे?
सन्डे के दिन:
1. पति अगर देर तक सोए तो ......
बीवी: अब उठ भी जाओ! तुम्हारे जैसा भी कोई है क्या? छुट्टी है तो इसका मतलब यह नहीं की सोते रहोगे।
2. पति अगर जल्दी उठ जाए तो
बीवी: पिछले जन्म में मुर्गे थे क्या? ठीक 4:30 बजे उठ कर कुकडू-कू करने लगते हो। इतना जल्दी उठकर क्या पहाड़ तोड़ लाओगे?
3. पति अगर सन्डे को घर पे ही रहे तो
बीवी: कुछ काम भी कर लिया करो। हफ्ते भर राह देखते हैं तुम्हारे सन्डे की, उसे भी तुम केवल नहाने धोने में ही लगा देते हो।
4. पति अगर सन्डे के दिन घर से देर तक बाहर रहे (काम के सिलसिले में) तो
बीवी: कहां थे तुम आज पूरा दिन? आज सन्डे है कभी मुँह से भगवान का नाम भी ले लिया करो।
5. पति अगर सन्डे को पूजा करे तो
बीवी: ये टल्ली बजाते रहने से कुछ नहीं होने वाला। अगर ऐसा होता तो इस
दुनिया के रईसों में टाटा या बिल गेट्स का नाम नहीं होता बल्कि किसी पुजारी
का नाम आता।
6. अगर टाटा या बिल गेट्स जैसा बनने के लिए पति दिन रात मेहनत करे तो
बीवी: हर वक़्त काम, काम काम, तुम्हें अपने ऑफिस के ही सात फेरे ले लेने
चाहिए थे। हम क्या यहाँ पर बंधुआ मजदूर है जो सारा दिन काम करें और शाम को
तुम्हारा इंतज़ार करें?
7. पति अगर पत्नी को घुमाने ले जाए तो
बीवी: हमारे बीच वाले जीजा जी तो दीदी को हर महीने घुमाने ले जाते हैं और
वो भी स्विट्ज़रलैंड और दार्जिलिंग जैसी जगहों पर। तुम्हारी तरह "हरिद्वार"
नहाने नहीं जाते।
8. पति अगर बे खौफ हो कर नैनीताल, मसूरी, गोवा, माउन्ट आबू, ऊटी जैसी जगहों पर घुमाने ले भी जाए तो
बीवी: अपना घर ही सबसे अच्छा, बेकार ही पैसे लुटाते फिरते है। इधर उधर
बंजारों की तरह घुमते फिरो। क्या रखा है घूमने में? इतने पैसा अगर घर पर
रहते तो पूरे 2 साल के लिए कपडे खरीद सकते थे।
The Metro Maza
Sunday, March 15, 2015
Thursday, February 26, 2015
वो ऐसा फंसा
ओह आज बड़ी भीड़ है वैसे तो रोज ही होती है, और रोज ही ज्यादा लगती है पर आज ज्यादा है :) । आज भी वही रुट था जो की रोज होता है मैं भी अपने मेट्रो स्टेशन से मेट्रो ली और निकल पड़ा अपने घर को वैसे ही रस्ते में लोगो को रीड करता हुआ क्यू की कोई दूसरा काम नहीं होता करने को और सफर भी बस एक घंटे का होता है तो अकेला मन क्या करे। अब खाली दिमाग तो शैतान का घर होता ही है और अगर ऐसे में कुछ ऐसा हो की बिलकुल ही सोचा न हो तो मज़ा आ ही जाता है ।
अब आज की ही बात ले लो वैसे तो कई खिस्से है पर ये वाला हट कर है हुआ यू की जब मेट्रो राजीव चौक पहुंची तो जैसा की होता है लोग लगे उतरने और चढ़ने और मैं भी उह्ह्ह कर के निकल ही गया पर, पर एक बंदा था दिलेर जो हिम्मत नहीं हरा और अंत तक चढ़ने की कोशिस करता रहा उस को ऐसा करता देख मैं भी रुक सा गया और उसका प्रयास देखता रहा और एक वाक्या बन गया ।
हुआ यू की वो बंदा कुछ तकिया (पिलो) लिए हुआ था और उस घनी भीड़ में पहले उस पिलो को चढ़ाने की कोशिस कर रहा था और सफल हुआ पिलो चढ़ गया पर वो नहीं मेट्रो डोर बंद मेट्रो निकल गई। …… गई। ....... गई
धत तेरी की अब क्या होगा वैसे उसने लोगो को उस पिलो को अगले स्टॉप पर बाहर कर देने को कहा था पर पता नहीं डोर बंद होने के बाद लोगो ने उसकी वो आवाज सुनी भी हो गी या नहीं और ये क्या अगली मेट्रो 6 मिनट बाद। ...................
मैं ने उसे सलाह दी की वो हेल्प सेंटर जाये और वहा इत्तला कर दे पर I don't know की उसने क्या किया उसे उसका सामान मिला भी या नहीं। ……
पर मैं मुस्कुराते हुए अपनी अगली मेट्रो पकड़ने को चल दिया।
अब आज की ही बात ले लो वैसे तो कई खिस्से है पर ये वाला हट कर है हुआ यू की जब मेट्रो राजीव चौक पहुंची तो जैसा की होता है लोग लगे उतरने और चढ़ने और मैं भी उह्ह्ह कर के निकल ही गया पर, पर एक बंदा था दिलेर जो हिम्मत नहीं हरा और अंत तक चढ़ने की कोशिस करता रहा उस को ऐसा करता देख मैं भी रुक सा गया और उसका प्रयास देखता रहा और एक वाक्या बन गया ।
हुआ यू की वो बंदा कुछ तकिया (पिलो) लिए हुआ था और उस घनी भीड़ में पहले उस पिलो को चढ़ाने की कोशिस कर रहा था और सफल हुआ पिलो चढ़ गया पर वो नहीं मेट्रो डोर बंद मेट्रो निकल गई। …… गई। ....... गई
धत तेरी की अब क्या होगा वैसे उसने लोगो को उस पिलो को अगले स्टॉप पर बाहर कर देने को कहा था पर पता नहीं डोर बंद होने के बाद लोगो ने उसकी वो आवाज सुनी भी हो गी या नहीं और ये क्या अगली मेट्रो 6 मिनट बाद। ...................
मैं ने उसे सलाह दी की वो हेल्प सेंटर जाये और वहा इत्तला कर दे पर I don't know की उसने क्या किया उसे उसका सामान मिला भी या नहीं। ……
पर मैं मुस्कुराते हुए अपनी अगली मेट्रो पकड़ने को चल दिया।
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